
दुर्गम पहाड़ों को पार कर घर-घर पहुंची सरकारी योजना : आंगनबाड़ी कार्यकर्ता कुन्तला तिर्की ने पेश की सेवा की अनूठी मिसाल
छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले से महिला सशक्तिकरण और कर्तव्यनिष्ठा की एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है। धरमजयगढ़ विकासखंड के वनांचल क्षेत्र में तैनात आंगनबाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती कुन्तला तिर्की ने कठिन रास्तों और सीमित संसाधनों की परवाह न करते हुए महतारी वंदन योजना के तहत 84 में से 83 आदिवासी महिलाओं की ई-केवाईसी प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी कराई है।
पहाड़ी रास्तों पर पैदल चलकर तय किया सफर
धरमजयगढ़ के कापू परियोजना के तहत आने वाला खम्हार सेक्टर जिला मुख्यालय से लगभग 120 किलोमीटर दूर वनों से घिरा हुआ है। इस सेक्टर के रामपुरिया आंगनबाड़ी केंद्र तक पहुंचने के लिए आज भी तीन से चार किलोमीटर का रास्ता पैदल ही नापना पड़ता है। विशेष पिछड़ी जनजाति पण्डो और कोरवा बाहुल्य वाले इस क्षेत्र में महतारी वंदन योजना का लाभ दिलाने के लिए ई-केवाईसी अनिवार्य थी, जो तकनीकी नेटवर्क न होने के कारण एक बड़ी चुनौती बनी हुई थी।
महिलाओं को साथ लेकर तय की 10 किलोमीटर की दूरी
कुन्तला तिर्की ने इस मुश्किल काम को एक मिशन की तरह लिया। उन्होंने गांव की महिलाओं को इस प्रक्रिया का महत्व समझाया। जिन महिलाओं के पास तकनीकी साधन नहीं थे, उन्हें वे खुद अपने साथ लेकर करीब 10 किलोमीटर दूर खम्हार और धरमजयगढ़ तक गईं, ताकि सरकारी दफ्तरों में औपचारिकताएं समय पर पूर्ण हो सकें। उनके इस प्रयास से कुल 84 पंजीकृत हितग्राहियों में से 83 का काम पूरा हो चुका है और आखिरी बचे एक हितग्राही की प्रक्रिया भी अंतिम चरण में है।
शासन की योजनाओं के प्रति बढ़ा ग्रामीणों का विश्वास
इस निस्वार्थ सेवा और समर्पण के चलते क्षेत्र की महिलाओं में अपने अधिकारों और सरकारी लाभों के प्रति जागरूकता बढ़ी है। आदिवासी बाहुल्य वनांचल बस्तियों में इस तरह के जमीनी प्रयासों से न केवल महिला सशक्तिकरण को बल मिल रहा है, बल्कि शासन-प्रशासन की लोक कल्याणकारी नीतियों के प्रति स्थानीय जनता का भरोसा भी मजबूत हुआ है। कुन्तला तिर्की का यह जज्बा आज पूरे जिले के मैदानी अमले के लिए एक मिसाल बन चुका है।



